महामारी के कठिन समय में Prayas Sansthan ने न सिर्फ़ इंसानों की मदद की, बल्कि बेसहारा पशु-पक्षियों और गौवंश की सेवा को भी अपना कर्तव्य बनाया।
COVID-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन में था और चारों ओर भय व असहायता का माहौल था, तब Prayas Sansthan ने सेवा को अपना संकल्प बनाया। हमारा उद्देश्य साफ़ था — कोई भी भूखा न सोए, कोई भी बेसहारा न रहे, चाहे वह इंसान हो या एक बेज़ुबान जानवर।
लॉकडाउन के समय दिहाड़ी मज़दूर, ज़रूरतमंद परिवार और सड़क किनारे रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। हमारी टीम ने घर-घर जाकर सूखा राशन, भोजन पैकेट और ज़रूरी सामग्री वितरित की, ताकि कोई भी परिवार भूख से परेशान न हो।
हमने विशेष रूप से उन लोगों तक मदद पहुँचाई जो इलाज, रोज़गार और संसाधनों से पूरी तरह वंचित हो चुके थे।
महामारी के दौरान सबसे ज़्यादा अनदेखी बेज़ुबान जानवरों की हुई। सड़क पर रहने वाले कुत्ते, गाय, पक्षी और अन्य जानवर भोजन के लिए भटक रहे थे।
Prayas Sansthan ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की।
हमारी टीम ने सड़कों पर, कॉलोनियों में और खुले मैदानों में जाकर जानवरों को दाना-पानी उपलब्ध कराया, ताकि कोई भी बेज़ुबान भूख से न मरे।
लॉकडाउन के समय कई गौशालाओं में चारे और दवाइयों की भारी कमी हो गई थी। हमने स्थानीय गौशालाओं के साथ मिलकर हरा चारा, भूसा, दवाइयाँ, साफ़ पानी
की व्यवस्था की।
हमारा मानना है कि गौसेवा केवल धर्म नहीं, बल्कि मानवता का कर्तव्य है।
COVID-19 के दौरान अस्पतालों में रक्त की भारी कमी हो गई थी। इस संकट को देखते हुए Prayas Sansthan ने सुरक्षित तरीक़े से रक्तदान शिविरों का आयोजन किया।
कई युवाओं और स्वयंसेवकों ने आगे आकर ज़रूरतमंद मरीज़ों के लिए रक्तदान किया, जिससे कई ज़िंदगियाँ बचाई जा सकीं।
यह सारी सेवा हमारे समर्थकों, दानदाताओं और स्वयंसेवकों के सहयोग के बिना संभव नहीं थी।
Prayas Sansthan सभी उन हाथों को नमन करता है जिन्होंने इस कठिन समय में मानवता और करुणा का साथ दिया।
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